Avaz AAC India

शिक्षा

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फायदे

  • हिंदी और भारतीय भाषाओं में संचार के लिए उपयोगी विकल्प
  • चित्रों और टेक्स्ट से वाक्य बनाना आसान है
  • ऑटिज़्म या बोलने में कठिनाई वाले बच्चों के लिए सहायक
  • व्यक्तिगत शब्दावली और पसंदीदा वाक्य जोड़ सकते हैं
  • ऑफ़लाइन उपयोग से हर जगह संचार संभव रहता है

नुकसान

  • शुरुआती सेटअप और शब्दावली तैयार करने में समय लग सकता है
  • सभी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए भुगतान आवश्यक हो सकता है
  • बहुत छोटे बच्चों को इंटरफ़ेस समझाने में सहायता चाहिए
  • डिवाइस बदलने पर कस्टम सेटिंग्स दोबारा बनानी पड़ सकती हैं
  • प्रभावी उपयोग के लिए अभिभावक या थेरेपिस्ट का प्रशिक्षण जरूरी है
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Avaz AAC India की समीक्षा Appxis

अगर आप किसी ऐसे बच्चे, किशोर या वयस्क के लिए संचार का रास्ता खोज रहे हैं जो बोलकर अपनी बात आसानी से नहीं कह पाता, तो Avaz AAC India को समझने का सबसे अच्छा तरीका इसे केवल एक शिक्षा ऐप नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों को व्यक्त करने वाले सहायक के रूप में देखना है। मैंने इसे पहली बार इस्तेमाल करते हुए यही महसूस किया कि इसकी असली उपयोगिता किसी आकर्षक स्क्रीन में नहीं, बल्कि उस छोटे से क्षण में है जब उपयोगकर्ता बिना अनुमान लगवाए अपनी पसंद, जरूरत या असहमति बता पाता है।

यह संचार और शिक्षण ऐप Avaz, LLC ने बनाया है और विशेष जरूरतों वाले बच्चों, किशोरों तथा वयस्कों को ध्यान में रखता है। इसे निःशुल्क इंस्टॉल किया जा सकता है, हालांकि ऐप के भीतर अलग-अलग खरीद उपलब्ध हैं, जिनकी कीमतें ₹70 से लेकर ₹11,999 प्रति आइटम तक जाती हैं। इसलिए शुरुआत करने वाले परिवार के लिए सबसे व्यावहारिक तरीका है कि पहले बिना जल्दबाजी के मूल अनुभव को समझें और फिर देखें कि भुगतान वाली चीज वास्तव में आपकी जरूरत पूरी करती है या नहीं।

पहली बार इस्तेमाल करने पर क्या उम्मीद रखें

यह ऐप उन लोगों के लिए है जिन्हें बोलने, शब्द खोजने, वाक्य बनाने या किसी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने में कठिनाई हो सकती है। इसका मूल्य इस बात में है कि उपयोगकर्ता अपनी बात किसी दूसरे व्यक्ति के मुंह से कहलवाने के बजाय खुद व्यक्त करने की दिशा में आगे बढ़ता है। यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन भोजन चुनने, दर्द बताने, मदद मांगने, किसी वस्तु की ओर संकेत करने या “नहीं” कहने जैसी स्थितियों में इसका असर बहुत बड़ा होता है।

मैं इसे सामान्य भाषा सीखने वाले ऐप की तरह नहीं देखूंगा। यहां लक्ष्य केवल नए शब्द याद करना नहीं है। लक्ष्य है कि उपयोगकर्ता किसी वास्तविक परिस्थिति में अर्थपूर्ण संदेश बना सके। इसीलिए माता-पिता, शिक्षक, स्पीच थेरेपिस्ट और देखभाल करने वालों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐप अकेले संचार नहीं सिखाता; यह अभ्यास, धैर्य और आसपास के लोगों की सही प्रतिक्रिया के साथ उपयोगी बनता है।

ऐप की उम्र रेटिंग तीन वर्ष और उससे अधिक के लिए है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर छोटे बच्चे के लिए इसे बिना तैयारी के दे देना सही होगा। बच्चे की दृष्टि, मोटर नियंत्रण, समझ और ध्यान की अवधि के अनुसार स्क्रीन का इस्तेमाल अलग तरह से व्यवस्थित करना पड़ेगा। बड़े उपयोगकर्ताओं के लिए भी यही बात लागू होती है: उम्र से अधिक महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति संकेतों, चित्रों या उपलब्ध संचार विकल्पों के साथ कितना सहज है।

स्टोर पर इसकी औसत रेटिंग 3.7 है और इसे 100K से अधिक बार इंस्टॉल किया जा चुका है। मेरे लिए ये आंकड़े केवल लोकप्रियता का संकेत हैं, गुणवत्ता की गारंटी नहीं। AAC ऐप का अनुभव व्यक्ति की जरूरत, भाषा, परिवार की भागीदारी और डिवाइस के इस्तेमाल पर बहुत निर्भर करता है। इसलिए किसी दूसरे उपयोगकर्ता की अच्छी या खराब राय को अपनी स्थिति का अंतिम फैसला मानना ठीक नहीं होगा।

इंस्टॉल के बाद पहला व्यावहारिक कदम

पहली बार ऐप खोलने से पहले मैं परिवार को एक छोटा लक्ष्य तय करने की सलाह दूंगा। उदाहरण के लिए, “बच्चा पानी मांग सके”, “उपयोगकर्ता पसंद और नापसंद बता सके” या “स्कूल में मदद मांगने का तरीका हो।” एक साथ भोजन, भावनाएं, लोगों के नाम, गतिविधियां और बातचीत सब सिखाने की कोशिश करने पर स्क्रीन उलझाऊ लग सकती है और उपयोगकर्ता जल्दी थक सकता है।

शुरुआत में उस व्यक्ति के सामने बैठें जो ऐप का उपयोग करेगा और उसकी नजर का अनुसरण करें। वह किन तस्वीरों या शब्दों पर रुकता है, किन्हें छूने से बचता है और किस विकल्प पर बार-बार लौटता है, यह ध्यान से देखें। यह निरीक्षण आपको बताता है कि समस्या केवल शब्दों की कमी नहीं, बल्कि बटन का आकार, स्क्रीन की जटिलता, चयन की गति या अर्थ समझने से भी जुड़ी हो सकती है।

मेरा सुझाव है कि पहले सत्र में ऐप को “टेस्ट” न बनाएं। उपयोगकर्ता से बार-बार पूछना कि “यह क्या है?” या “बोलो, क्या चाहिए?” दबाव पैदा कर सकता है। इसके बजाय आप खुद ऐप में संदेश बनाकर मॉडल करें। यदि आप पानी पी रहे हैं, तो पानी से संबंधित विकल्प चुनकर सहज ढंग से दिखाएं कि ऐप से विचार कैसे व्यक्त किया जा सकता है। उपयोगकर्ता को तुरंत सही उत्तर देने के लिए मजबूर न करें।

एक उपयोगी शुरुआती अभ्यास है कि दिन में होने वाली एक नियमित गतिविधि चुनें, जैसे नाश्ता। उस समय केवल उन्हीं संदेशों पर ध्यान दें जिनकी वास्तविक जरूरत है: पसंद की चीज, और चाहिए, खत्म, मदद या नहीं। यह सीमित संदर्भ उपयोगकर्ता को स्क्रीन और परिस्थिति के बीच संबंध समझने में मदद करता है। बाद में वही तरीका कपड़े पहनने, बाहर जाने या आराम करने के समय दोहराया जा सकता है।

पहली सफल बातचीत कैसी दिख सकती है

पहली सफलता कोई लंबा वाक्य नहीं होती। यदि उपयोगकर्ता किसी विकल्प को चुनकर आपको यह समझा देता है कि उसे पानी चाहिए और आप सही प्रतिक्रिया देते हैं, तो वह एक अर्थपूर्ण संचार अनुभव है। यहां सबसे जरूरी बात है कि चयन के बाद आप उसकी बात को गंभीरता से लें। पानी मांगने पर पानी दें, विराम मांगने पर गतिविधि रोकें और गलत चयन होने पर तुरंत डांटने के बजाय शांतिपूर्वक दूसरा अवसर दें।

एक वास्तविक दृश्य की कल्पना करें। बच्चा शाम को बेचैन है और परिवार अनुमान लगा रहा है कि शायद वह थका है, भूखा है या खिलौना चाहता है। देखभाल करने वाला ऐप में उपलब्ध विकल्पों के साथ धीरे-धीरे पूछता है और बच्चे को खुद चयन करने का समय देता है। बच्चा किसी पसंदीदा गतिविधि या वस्तु से जुड़ा विकल्प चुनता है। यदि परिवार उसकी पसंद को स्वीकार करता है, तो बच्चे को यह अनुभव होता है कि ऐप केवल अभ्यास की चीज नहीं, बल्कि उसकी बात सुनाने का साधन है।

यहां एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बात है: हर चयन को प्रश्न का उत्तर न बनाएं। कभी-कभी उपयोगकर्ता केवल खोज रहा होता है, स्क्रीन को छू रहा होता है या किसी चित्र में रुचि दिखा रहा होता है। यदि हर स्पर्श पर परिवार तुरंत अर्थ थोप देगा, तो उपयोगकर्ता संचार से बच सकता है। मैं चयन के बाद थोड़ा रुकने, चेहरे और शरीर की प्रतिक्रिया देखने और फिर जरूरत पड़ने पर पुष्टि करने को बेहतर तरीका मानता हूं।

परिवार के लिए एक सरल रिकॉर्ड रखना भी उपयोगी हो सकता है। कागज पर लिखें कि किस समय कौन-सा संदेश सफल रहा, किस परिस्थिति में भ्रम हुआ और किस विकल्प तक पहुंचने में अधिक सहायता लगी। यह रिकॉर्ड ऐप की किसी विशेष सुविधा पर निर्भर नहीं करता, लेकिन इससे आपको पता चलता है कि कौन-से संदेश वास्तव में रोजमर्रा की जिंदगी में काम आ रहे हैं और कौन-से केवल स्क्रीन पर मौजूद हैं।

शिक्षण और संचार को एक साथ कैसे रखें

Avaz AAC India की शिक्षा श्रेणी में मौजूदगी को केवल अकादमिक सीखने के रूप में समझना सीमित दृष्टिकोण होगा। संचार खुद सीखने की बुनियाद है। जब उपयोगकर्ता “मदद”, “फिर से”, “खत्म” या “मुझे पसंद नहीं” जैसी बातें व्यक्त कर पाता है, तो वह कक्षा, घर और सामाजिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय हो सकता है। इसलिए ऐप का उपयोग केवल थेरेपी सत्र तक सीमित रखना इसकी उपयोगिता घटा सकता है।

मैंने पाया कि सबसे अच्छा तरीका “मॉडलिंग” है। इसका अर्थ है कि वयस्क खुद ऐप का इस्तेमाल करके संदेश बनाता है, जबकि उपयोगकर्ता देख रहा होता है। उदाहरण के लिए, गतिविधि शुरू करते समय वयस्क उस गतिविधि से जुड़ा संदेश चुन सकता है और खत्म होने पर समाप्ति का संदेश दिखा सकता है। इससे उपयोगकर्ता को यह समझ आता है कि ऐप केवल उससे सवाल पूछने के लिए नहीं है; दूसरे लोग भी इसे संचार के हिस्से के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

एक और उपयोगी रणनीति है कि उपयोगकर्ता को केवल इच्छित वस्तु मांगने तक सीमित न रखें। यदि हर बार ऐप खोलने का कारण सिर्फ खाना या खिलौना मांगना होगा, तो संचार का दायरा छोटा रह जाएगा। धीरे-धीरे पसंद, असहमति, भावनाएं, लोगों के नाम, स्थान और घटनाओं पर प्रतिक्रिया जैसे संदेशों को भी रोजमर्रा के संदर्भ में जगह दें। यह काम धीरे होना चाहिए, क्योंकि बहुत सारे विकल्प एक साथ जोड़ने से उपयोगकर्ता और सहायक दोनों भ्रमित हो सकते हैं।

स्कूल या थेरेपी में इस्तेमाल करने से पहले परिवार को एक साझा तरीका तय करना चाहिए। यदि शिक्षक एक शब्द के लिए अलग संकेत इस्तेमाल करता है और घर पर देखभाल करने वाला दूसरा, तो उपयोगकर्ता को सीखने के बजाय नियमों का अंतर समझना पड़ेगा। ऐप का लाभ तब अधिक मिलता है जब आसपास के लोग एक ही संदेश को समान अर्थ और समान सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं।

जहां नए उपयोगकर्ता अक्सर अटकते हैं

सबसे आम भ्रम यह होता है कि ऐप खोलते ही उपयोगकर्ता अपने आप संवाद करना शुरू कर देगा। AAC में शुरुआत अक्सर धीमी होती है। व्यक्ति को स्क्रीन देखना, विकल्प पहचानना, चयन करना, प्रतिक्रिया का इंतजार करना और अपनी बात के परिणाम को समझना पड़ता है। यदि परिवार हर बार उंगली पकड़कर सही विकल्प चुनवा देगा, तो चयन देखने में सही लगेगा लेकिन संचार की स्वतंत्रता विकसित नहीं होगी। सहायता दें, पर धीरे-धीरे उसे कम करने का लक्ष्य रखें।

दूसरी परेशानी यह है कि लोग गलत चयन को विफलता समझ लेते हैं। कई बार उपयोगकर्ता ने वही चुना होता है जो उसे दिखा, न कि वह जो वह कहना चाहता था। कभी स्क्रीन पर विकल्प बहुत पास हो सकते हैं, कभी शब्द का अर्थ स्पष्ट नहीं होता, और कभी वह केवल किसी विकल्प को आजमा रहा होता है। ऐसे समय “गलत” कहने के बजाय आप शांत स्वर में दो संभावनाएं रख सकते हैं और उसे दोबारा चयन का समय दे सकते हैं।

परिवारों को भुगतान वाली सामग्री को लेकर भी सावधान रहना चाहिए। ऐप मुफ्त है, लेकिन इन-ऐप खरीद अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध हैं। खरीद का निर्णय केवल इसलिए न लें कि अधिक सामग्री अपने आप बेहतर संचार देगी। पहले देखें कि मौजूदा अनुभव में असली अड़चन क्या है। यदि समस्या उपयोगकर्ता की थकान, गलत मॉडलिंग या बहुत लंबी गतिविधि है, तो अतिरिक्त सामग्री खरीदने से वह हल नहीं होगी।

वर्जन 8.0.4 इस्तेमाल करने वाले नए उपयोगकर्ता को भी ऐप की स्क्रीन देखकर तुरंत अपनी पूरी संचार प्रणाली बदलने की जरूरत नहीं है। पहले इसे मौजूदा दिनचर्या के साथ जोड़ें। यदि व्यक्ति पहले इशारे, तस्वीर, लिखावट या किसी अन्य साधन से बात करता है, तो उन तरीकों को अचानक हटाना जोखिम भरा हो सकता है। AAC का उद्देश्य संचार के विकल्प बढ़ाना है, न कि उपयोगकर्ता को तब तक चुप रखना जब तक वह ऐप में सही विकल्प न चुन ले।

सामान्य विकल्पों से तुलना करते समय क्या देखें

कई परिवार पहले हाथ के इशारे, घर में बनाई गई तस्वीरों की शीट, नोटबुक या फोन के साधारण टेक्स्ट-टू-स्पीच विकल्प आजमाते हैं। ये तरीके बेकार नहीं हैं। कागज की तस्वीरें बिजली या ऐप के मेनू पर निर्भर नहीं होतीं और नोटबुक उन उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर हो सकती है जो लिखना पसंद करते हैं। साधारण टेक्स्ट-टू-स्पीच उन लोगों के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है जो टाइप कर सकते हैं और शब्दों से जल्दी वाक्य बनाते हैं।

Avaz AAC India का आकर्षण उन उपयोगकर्ताओं के लिए है जिन्हें संरचित, दृश्य और दोहराए जा सकने वाले संचार अनुभव की जरूरत है। यदि व्यक्ति चित्रों या उपलब्ध विकल्पों के माध्यम से अपनी बात बनाना सीख सकता है, तो फोन पर मौजूद प्रणाली कागज के कई पन्नों की तुलना में अधिक सुविधाजनक लग सकती है। लेकिन यदि उपयोगकर्ता की जरूरत बहुत जटिल, अत्यधिक व्यक्तिगत या तेज टाइपिंग पर आधारित है, तो कोई दूसरा AAC समाधान बेहतर बैठ सकता है।

किसी विकल्प को चुनते समय केवल यह न पूछें कि ऐप कितना सुंदर दिखता है। असली सवाल यह है कि उपयोगकर्ता कितनी कम सहायता में अर्थपूर्ण संदेश बना पा रहा है। क्या वह “नहीं” कह सकता है? क्या वह मदद मांग सकता है? क्या वह किसी पसंदीदा चीज के बारे में खुद पहल कर सकता है? क्या परिवार उसकी बात को सही समय पर समझ पाता है? इन्हीं सवालों के जवाब ऐप की वास्तविक उपयोगिता बताते हैं।

अगले स्तर पर जाने की मेरी सलाह

पहले सप्ताह के लिए मैं एक छोटी दिनचर्या चुनूंगा और हर दिन उसी समय ऐप का उपयोग करूंगा। हर सत्र को छोटा, शांत और उद्देश्यपूर्ण रखें। एक ही संदेश को अलग-अलग स्थितियों में दिखाना उपयोगी है, क्योंकि उपयोगकर्ता को यह समझना होता है कि शब्द या चित्र केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि कई संदर्भों में काम आ सकता है।

दूसरे चरण में परिवार उपयोगकर्ता की पहल पर ध्यान दे। वह खुद ऐप खोलता है, किसी विकल्प तक पहुंचता है, वयस्क की ओर देखता है या चयन दोहराता है—ये सभी संकेत हो सकते हैं कि वह संचार शुरू करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करके केवल निर्धारित अभ्यास कराने से सीखने का स्वाभाविक हिस्सा छूट सकता है।

तीसरे चरण में कठिन परिस्थितियों को शामिल करें, जैसे गतिविधि बदलना, बाहर निकलना, इंतजार करना या किसी पसंदीदा चीज का उपलब्ध न होना। यहीं “रुको”, “बाद में”, “नहीं चाहिए” और “मदद” जैसे संदेश सबसे अधिक मायने रखते हैं। यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन इन्हीं क्षणों में ऐप वास्तविक जीवन का सहारा बनता है।

यदि उपयोगकर्ता को बार-बार निराशा हो, तो लक्ष्य छोटा करें। स्क्रीन पर कम विकल्प रखें, प्रतिक्रिया का समय बढ़ाएं और एक परिचित गतिविधि पर लौटें। यदि वह लगातार किसी चयन को नहीं समझ पा रहा, तो समस्या उसकी क्षमता नहीं, प्रस्तुति के तरीके में भी हो सकती है। शिक्षक, स्पीच थेरेपिस्ट या अन्य विशेषज्ञ की सलाह इस स्थिति में उपयोगी हो सकती है, खासकर जब परिवार को यह तय करना हो कि किस तरह के संचार लक्ष्य पहले रखे जाएं।

मेरी अंतिम राय में, Avaz AAC India उन परिवारों के लिए सार्थक शुरुआत है जो संचार को केवल शब्द बोलने की क्षमता नहीं, बल्कि अपनी इच्छा और निर्णय व्यक्त करने का अधिकार मानते हैं। इसका निःशुल्क प्रवेश शुरुआती प्रयोग को आसान बनाता है, और विशेष जरूरतों वाले उपयोगकर्ताओं के लिए इसका उद्देश्य स्पष्ट है। फिर भी इसे जादुई समाधान समझना गलत होगा। परिणाम स्क्रीन से कम और उस वातावरण से अधिक आएगा जिसमें उपयोगकर्ता को बिना शर्म, बिना जल्दबाजी और बिना हर चयन को परीक्षा बनाए अपनी बात कहने का मौका मिलता है।

यह ऐप आपके लिए सही हो सकता है यदि आप रोजमर्रा की छोटी जरूरतों से शुरुआत करने, परिवार को मॉडलिंग सिखाने और धीरे-धीरे स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इसके बजाय कोई दूसरा तरीका चुनना बेहतर होगा यदि उपयोगकर्ता लिखित टेक्स्ट, इशारों या किसी अधिक व्यक्तिगत प्रणाली से पहले ही प्रभावी ढंग से संवाद करता है। मेरे लिए इसका सबसे मजबूत कारण यही है कि यह “क्या बोलना है” से पहले “अपनी बात रखने का अवसर” देता है।

Avaz, LLC का यह ऐप 4 अप्रैल 2013 को जारी हुआ था और वर्तमान संस्करण 8.0.4 है। न्यूनतम ऑपरेटिंग सिस्टम 9 की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इंस्टॉल से पहले अपने डिवाइस की संगतता देख लें। सही व्यक्ति, सही लक्ष्य और सहयोगी वातावरण के साथ यह शिक्षा श्रेणी का एक व्यावहारिक संचार साधन बन सकता है—खासकर तब, जब पहली सफलता को लंबी बातचीत नहीं, बल्कि उपयोगकर्ता की अपनी आवाज चुनने के रूप में समझा जाए।

FAQ

Avaz AAC India क्या है और यह किसके लिए उपयोगी है?

Avaz AAC India एक ऑगमेंटेटिव और अल्टरनेटिव कम्युनिकेशन (AAC) ऐप है, जिसे बोलने में कठिनाई वाले बच्चों और वयस्कों के लिए बनाया गया है। यह उपयोगकर्ता को चित्रों, प्रतीकों और टेक्स्ट की सहायता से अपनी जरूरत, भावना या विचार व्यक्त करने देता है। ऑटिज़्म, स्पीच डिसऑर्डर, सेरेब्रल पाल्सी या अन्य संचार संबंधी चुनौतियों वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।


क्या Avaz AAC India में हिंदी और भारतीय भाषाओं का समर्थन मिलता है?

हाँ, Avaz AAC India का मुख्य उद्देश्य भारतीय उपयोगकर्ताओं को स्थानीय भाषाओं में संचार सुविधा देना है। ऐप में हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं के विकल्प और संबंधित शब्दावली उपलब्ध हो सकती है, जिससे बच्चे या उपयोगकर्ता अपनी परिचित भाषा में वाक्य बना सकें। हालांकि, भाषा विकल्प डिवाइस, ऐप संस्करण और उपलब्ध पैक के अनुसार बदल सकते हैं, इसलिए डाउनलोड से पहले वर्तमान भाषा सूची अवश्य जाँचें।


क्या इस ऐप को चलाने के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है?

Avaz AAC India की कई मुख्य संचार सुविधाएँ, जैसे चित्र चुनना और पहले से उपलब्ध शब्दों से वाक्य बनाना, सामान्यतः ऑफलाइन उपयोग की जा सकती हैं। फिर भी प्रारंभिक डाउनलोड, भाषा पैक, अपडेट, बैकअप या कुछ अतिरिक्त सामग्री के लिए इंटरनेट की आवश्यकता पड़ सकती है। यात्रा या कमजोर नेटवर्क वाले स्थानों पर उपयोग से पहले आवश्यक सामग्री डाउनलोड करके ऐप को ऑफलाइन जरूर परख लेना बेहतर है।


क्या माता-पिता, शिक्षक या स्पीच थेरेपिस्ट Avaz AAC India को व्यक्तिगत रूप से सेट कर सकते हैं?

हाँ, ऐप की उपयोगिता बढ़ाने के लिए इसमें उपयोगकर्ता की उम्र, समझ और दैनिक जरूरतों के अनुसार शब्दावली तथा चित्रों को व्यवस्थित किया जा सकता है। माता-पिता और थेरेपिस्ट अक्सर घर, स्कूल, भोजन, भावनाओं और सामाजिक बातचीत से जुड़े शब्द जोड़कर संचार बोर्ड को अधिक प्रासंगिक बनाते हैं। शुरुआत में सेटअप में समय लग सकता है, लेकिन नियमित अभ्यास के बाद उपयोग अधिक सहज हो जाता है।


क्या Avaz AAC India बोलने की क्षमता को पूरी तरह बदल देता है या यह केवल सहायक साधन है?

Avaz AAC India का उद्देश्य बोलने की क्षमता को बदलना नहीं, बल्कि संचार को आसान और स्वतंत्र बनाना है। कुछ उपयोगकर्ताओं में ऐप के साथ अभ्यास करने से शब्दावली, भाषा समझ और बोलने का आत्मविश्वास बेहतर हो सकता है, जबकि अन्य लोग इसे लंबे समय तक मुख्य संचार माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। सही परिणाम व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करते हैं, इसलिए स्पीच थेरेपिस्ट या विशेषज्ञ की सलाह उपयोगी रहती है।


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